हमारा समाज

किवदंती है कि पालीवाल ब्राह्मण महाराज हरिदास के वंशज हैं, ये लगभग 6 हजार वर्ष पूर्व हुए थे और महारानी रुक्मणी के पुरोहित थे इन्होंने ही श्रीकृष्ण के पास रुक्मणी की प्रेमपांती पहुंचाई थी। वे उच्चश्रेणी के सच्चे ब्राह्मण थे। उनका जन्म ग्राम कुन्दनपुर में हुआ था। श्रीकृष्ण ने उनसे प्रसन्न होकर उन्हें बहुत सा धन तथा गुजरात में जमीन दी थी, जिस पर उन्होंने अपने नाम पर हरिपुर ग्राम बसाया था जो अभी भी खण्डहर के रुप में मौजूद है । वहां से हमारे पुरखाओं का मारवाड़ जाने तथा पाली में बसने का उल्लेख इतिहास में मिलता है। पाली राजस्थान के सुप्रसिद्ध नगर जोधपुर के दक्षिण भाग में मारवाड़ जंक्शन रेल्वे लाईन पर बसा है।